क्यों जन्म शुभ और मौत अशुभ है ?| Hindu Dharm Mein Janm ko Shubh Aur Maut ko Ashubh kyon Maana Jaata Hai ?
हिन्दू धर्म प्राचीनतम धर्म है ,यहाँ हर जन्म पर उत्सव होता है ,इस धर्म में आत्मा को नश्वर माना गया है,आत्मा न पैदा होती है और न ही मरती है,यह अजर अमर है। ऐसा धर्म शास्त्रों में बताया गया है । अगर इन तथ्यों को समझे तो जब कोई जन्म लेता है,तो उसके जन्म के साथ कुछ पॉज़िटिविटी आती है जो हमारे जीवन में कुछ अच्छा होने का संकेत देती है । जबकि मृत्यु एक नकारात्मक संकेत है जिसमे हमारे प्रियजन को खोना पड़ता है अतः हिन्दू धर्म में जन्म को शुभ और मौत को अशुभ माना जाता है।
हिन्दू धर्म में भगवान् के जन्म का शुभ जन्म उत्सव
सनातन धर्म में हमेशा से ही देवो के जन्म को मनाने की प्रथा रही है चाहे वो भगवान कृष्ण का उत्सव जन्म अष्ट्मी हो या भगवान राम का जन्म उत्सव,भगवान हनुमान का जन्म आदि को धर्म में जयंतियो के रूप में मनाया जाता है ।
जब भी भगवान ने किसी भी रूप में धरती पे जन्म लिया हो और उस अवतार को त्याग (देह त्याग) कर अपने स्वरूप में फिर से समाहित हुए हो ,परन्तु उनके उस देह त्याग को हिन्दू धर्म में किसी भी रूप में नहीं मनाया जाता है |
इसके विपरीत ईसाई धर्म के लोगों द्वारा कैलवरी में ईसा मसीह को शूली पर चढ़ाने के कारण हुई मृत्यु के उपलक्ष्य में गुड फ्राइडे के रूप में मनाया है। और लोग गुड फ्राइडे के दिन दोपहर बाद चर्च में एकत्रित होकर लगभग 3 बजे प्रार्थना करते हैं।
इस्लाम धर्म में मुहर्रम (Muharram)
इस्लाम धर्म में मुहर्रम (Muharram) मातम मनाने और धर्म की रक्षा करने वाले हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करने का दिन है। मुहर्रम के महीने में मुसलमान शोक मनाते हैं।
और अपनी हर खुशी का त्याग कर देते हैं। ईसाई धर्म व इस्लाम धर्मदोनों ही धर्मो में मृत्यु के बाद उनके देह को कब्रों में दफ़न कर दिया जाता है। और उसपे कब्रगाह बना दी जाती है। लोग समय समय पर उन कब्रगाहो में जाकर उनको याद करते हैं।मुग़ल राजाओ ने बड़े-बड़े मकबरे बनवाये थे, जहाँ पर मुग़ल शासक आज भी दफ़न है, इन दोनों ही धर्मो में मृत्यु के उपरांत काफी तवज्जो दी जाती है। जिसके कारण ही ईसाई व् इस्लाम धर्म में कब्रों और मकबरो को बनाया जाता रहा है।
मृत्यु के बाद उसकी स्मृतियों को हटाना (मृत्यु एक नकारात्मक संकेत है)
हिन्दू धर्मो में इंसान की मृत्यु हो जाने बाद ही जल्दी ही उसको शमशान घाट पर ले जाकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाता है और एक विशेष रीती का अनुसरण किया जाता है जिससे उसकी स्मृतिया नष्ट जाये इसके बाद शमशान घाट को छोड़ते समय पीछे की और देखने की मनाही होती है|इस धर्म के लोग किसी भी चीज को जो उस मृत्य शरीर के संपर्क में आती है तो उसको नष्ट या घर से हटा देते है उनका मानना है की मृत्यु के बाद आत्मा एक निश्चित मार्ग स्वर्ग या नरक की ओर चलती है ओर तब तक उनके मुक्ति के लिए धार्मिक क्रियाये की जाती है । सनातन धर्म में के अनुसार स्वर्ग धरती के ऊपर है तो नरक धरती के नीचे पाताल भूमि में हैं।
हिन्दू धर्म ग्रंथो में रामायण भागवत को विशेष महत्व
हिन्दू धर्म में कई धार्मिक ग्रन्थ है,जैसे- महाभारत ,रामायण , भागवत पुराण जिसमे रामायण ओर भागवत पुराण को विशेष महत्व दिया जाता है। इनका पाठ हिन्दू धर्मो में शुभ कार्यो में किया जाता है। इसमें रामायण में भगवान राम के जन्म का सुन्दर वर्णन किया गया है ओर भागवत पुराण में श्री कृष्ण के जन्म का वर्णन है।
जबकि महाभारत का पाठ घरो में नहीं कराया जाता है महाभारत में भगवान कृष्ण के जन्म को वर्णित भी नहीं किया गया है। रामायण में रावण के वध का भी वर्णन किया गया है लेकिन इसे अधर्म पे धर्म की जीत के रूप में दिखाया जाता है ।
हालाकि हिन्दू धर्म में धार्मिक गुरुओं की समाधि की एक परम्परा रही है परन्तु सांसारिक जीवन में हिन्दू समाज ऐसा नहीं होता है केवल आधात्मिक गुरुओ साधु संतो में कुछ अति पूजनीय के लिए ऐसा किया जाता रहा है हालांकि कुछ नेताओ ,राजाओ को भी मरणोपरांत उनके समृति स्वरूप स्थल बनाये गए है।
सभी धर्मो में जन्म और मृत्यु के अपने अपने नियम है हिन्दू धर्म में मृत्य शरीर का हिस्सा या उस मृत्य शरीर के संपर्क में आने वाली वस्तुओ को भी अपने निवास स्थल से हटा दिया जाता है, और कुछ धर्मो में अंतिम संस्कार करने के बाद उनके कुछ अवशेष जैसे दांत, हड्डी अपने पास रख लेते है।
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