विभिन्न धर्मों में स्वर्ग- नरक |Kya hai Swarg Aur Narak Dharmo me?

विभिन्न धर्मों में स्वर्ग- नरक का अलग-अलग उल्लेख किया गया है, जो मृत्युलोक में आया है उसे एक दिन अपने शरीर को छोड़कर अपने कर्मो अनुसार स्वर्ग और नरक में जाना ही होता है। यह परम सत्य है, शरीर में मौजूद उर्जा जिसे आत्मा कहते हैं वह समाप्त नहीं होती बस रूपान्तरित होती रहती है। और यही प्रक्रिया हर अलग -अलग धर्मों में स्वर्ग और नरक (Swarg -Narak) के बारे उनके बहुमूल्य धार्मिक पुस्तकों में विस्तार से बताई गयी है |
Kya-hai-Swarg-Aur-Narak
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स्वर्ग या नरक 


हर प्राणी की इच्छा मृत्यु के उपरांत स्वर्ग प्राप्ति की होती है क्योकि प्राणी हमेशा से ही सुख भोगने की लालसा अपने मन में रखता है परन्तु स्वर्ग और नरक दोनों की प्राप्ति का आधार केवल उसके द्रारा किये गए कर्मो पे निर्भर करता है कि उसे स्वर्ग या नरक (Swarg -Narak) में से किसकी प्राप्ति होगी ।


आइये अब हम आपको विभिन्न धर्मो के स्वर्ग और नरक के बारे में विस्तार से बताते है कि उनके यहाँ स्वर्ग और नरक की क्या परिभाषाये है |और किस प्रकार मनुष्य को उनके धर्मो में दिए गए नियमो के हिसाब से स्वर्ग और नरक प्राप्त होता है।


हिन्दू धर्म में स्वर्ग  | Hindu Dharam Me Swarg

हिन्दू धर्म में यमराज को मृत्यु का देवता माना गया है।
मान्यता के अनुसार व्यक्ति की मृत्यु हो जाने के बाद यमदूत उसकी आत्मा को धरती से यमलोक ले जाते हैं।आत्मा शरीर को त्यागकर आगे की यात्रा प्रारंभ करती है आत्मा सैतालिस दिन तक यात्रा करने के पश्चात यमपुरी पहुंचती है अत: आत्मा के कर्मों पर ही निर्भर करता है कि वह किस मार्ग पर चलेगी।
पुराणों के अनुसार आत्मा के लिए तीन मार्ग होते है  1- अर्चि मार्ग, 2-धूम मार्ग और 3- उत्पत्ति-विनाश मार्ग। अर्चि मार्ग ब्रह्मलोक और देवलोक की यात्रा के लिए होता है, वहीं धूममार्ग पितृलोक की यात्रा पर ले जाता है और उत्पत्ति-विनाश मार्ग नर्क की यात्रा के लिए होता है।
स्वर्ग की अवधारणा मीमांसा दर्शन में मिलती है, जिसके अनुसार व्यक्ति के अच्छे कर्मो के अनुसार उसकी आत्मा सभी प्रकार के सुखो का आनंद प्राप्त करती है, जब अच्छे कर्मो का समय समाप्त हो जाता है,तो आत्मा पुनः शरीर धारण करके जन्म लेती है|

 

हिन्दू धर्म में नरक | Hindu Dharam Me Narak

 

यदि कर्म बुरे हैं तो आत्मा को नर्क में दुःख झेलना पड़ता है| नरक में आत्मा को उनके किये गए पापों के अनुसार सजा मिलती है | जैसे - गर्म तेल की कढ़ाई में डालकर घंटों रखा जाता है|
आत्माओं को कोड़े से पिटा जाना और फिर गर्म खभों से बांधकर कई दिनों तक रखा जाना।

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आत्माओं को भूखा रखा जाता और फिर उस व्यक्ति की आत्मा को जहरीले जानवर काटकर खाते है या शरीर का एक-एक बूंद खून जानवरो द्रारा पिया जाना आदि सजाये नरक में आत्माओ को दी जाती है। जब आत्मा अपने कर्मो का फल भोग लेती है, तो उसे फिर से शरीर धारण करना पड़ता है| यानि की हिन्दू धर्म में कर्मो अनुसार स्वर्ग और नरक (Swarg Aur Narak) भोगने पड़ते है |

इस्लाम धर्म में स्वर्ग और नरक | Islam Dharam Me Swarg Aur Narak

Kya-hai-Swarg-Aur-Narak-Dharmo-meइस्लाम में स्वर्ग को जन्नत कहा गया है और नरक को जहन्नुम या दोजख़ कहा जाता है।कुरान में कहा गया है की इंसानो के किए गए पुण्य उसके पापों पर भारी पड़ जाते हैं। तो उसे जन्नत का सुख नसीब होता है। इस्लाम के अनुसार जन्नत एक ऐसा भव्य बागीचा है,जहां आत्माएं आरामदायक हरी मसनादों और कालीन, गलीचे पर पर दिनभर विश्राम करती हैं।कुरान के मुताबिक स्वर्ग में आत्माएं हरे रंग के वस्त्र तथा चांदी के आभूषण धारण करती हैं। जन्नत में बड़े बड़े बाग़ होते है, जिसमे मेवे खजूर और अनार होते हैं|
अगर गुनाहों का वजन ज्यादा हो तो उसे दोखज यानी की नरक की सजा मिलती है। इस्लाम में नरक को आग और दण्ड का मिश्रण बताया गया है। यहां आते ही आत्माओं को आग में झोंक दिया जाता है और बाद में उन्हें लोहे की छड़ी से मारा जाता है।

यहूदी धर्म में स्वर्ग और नरक | Yahoodee Dharm Me Swarg Aur Narak.

 

Kya-hai-Swarg-Aur-Narak-Dharmo-meयहूदी धर्म को अत्यंत पुराना लगभग 4000 वर्ष पुराना माना जाता है, लेकिन फिर भी इस धर्म में स्वर्ग की कोई पूरी परिभाषा नहीं है।
मान्यताओं के अनुसार यहूदियों में मनुष्य की मृत्यु के बाद एक मसीहा अवतरित होता है| और परम्परा के अनुसार उस मृत शरीर की आत्मा को एक नया जीवन प्रदान करके चला जाता है।
यहूदी धर्म में यहूदी मृत्यु के बाद की दुनिया में यक़ीन नहीं रखते। यहूदी धर्म किसी निर्धारित पाप को मान्यता नहीं देता, जिसमें मनुष्य जन्म से ही पापी हो बल्कि, इसमें पाप व प्रायश्चित को निरंतर प्रक्रिया के रूप में माना जाता है। प्रायश्चित ही मुक्ति है।

पारसी धर्म में स्वर्ग और नरक | Parsi Dharma Me Swarg Aur Narak .

इस धर्म अनुसार स्वर्ग एक ऐसा स्थान है जो अत्यंत बड़ा एवं अति सुन्दर बगीचा है, जिसके चारों ओर बहुत ही सुन्दर तरह की दीवारें बनी हुई हैं। पारसी धर्म के अनुसार मृत्यु के बाद सभी आत्माएं स्वर्ग में ही जाती हैं। लेकिन उन्हें वहां पहुंचने में उन आत्माओ को कितना समय लगता है, यह उनके  किये गए पाप-पुण्यों पर निर्भर करता है।
Kya-hai-Swarg-Aur-Narak-Dharmo-meपारसी धर्म के अनुसार मृत्यु के चौथे दिन उसकी आत्मा को स्वर्ग जाने के लिए एक पुल का रास्ता दिखाया जाता है। यदि उसने जीवन में अच्छे कर्म और पुण्य कार्य किये है तो वह पुल बड़ा होता है। पुल के उस पार पहुंचने पर उसे एक अत्यंत सुंदर स्त्री लेने आती है | जो उसे ‘हाउस ऑफ सॉंग’ ले जाती है यहाँ पर वह आत्मा अपनी यात्रा के अंतिम चरण का इंतजार करता है। अंत में वह चरण पूरा हो जाने के बाद उसे आखिरी दिन पर स्वर्ग में प्रवेश दिया जाता है |जहां उसकी आत्मा को हर प्रकार का सुख प्रदान किया जाता है।
लेकिन यदि इसके विपरीत उसके बुरे कर्म उसके अच्छे कर्मों पर हावी होते हैं तो यह पुल छोटा होता जाता है | और उसे नर्क के मुंह की और ढकेलता है।


ईसाईधर्म में स्वर्ग और नरक | Christian's Swarg And Narak.

Kya-hai-Swarg-Aur-Narak-Dharmo-meस्वर्ग वह स्थान है जहां पर फरिश्ते रहते हैं ईसाई धर्म की मान्यताओं के अनुसार यहाँ पर मृत्यु के उपरांत उन सभी आत्माओ को लाया जाता है जिनको पृथ्वी पर रह कर पुण्य या अच्छे कर्म किये होते है। वह सभी पुण्य आत्माये स्वर्ग में रहती है और अपने पुण्य का प्रभाव समाप्त हो जाने पर उन्हें फिर से उन्हें धरती पर जीवन व्यतीत करने के लिए भेजा जाता है।
 
बाइबिल के अनुसार जिन मृत इंसानों की आत्मा का नाम ‘बुक ऑफ
लाइफ में नहीं पाया जाता है। उन्हें स्वर्ग में नहीं बल्कि आग की झील यानि
नरक (हेल) में ढकेल दिया जाता है। जो हमेशा ही आग की लपटों में जलती रहती है
और उन्हें यहाँ सजा मिलती है।


बौद्ध धर्म में स्वर्ग और नरक |Bauddh Dharm me Swarg aur Narak.

Kya-hai-Swarg-Aur-Narak-Dharmo-meभगवान बुद्ध के अनुसार मनुष्य की इच्छाएं उसका नाश करती हैं वह अपने इच्छा पूर्ति के लिए अनैतिक कार्य भी करता है,वह अपनी इच्छाओं के लिए जीता है और इन्हीं इच्छाओं को पूर्ण करने के लिए पुन: जन्म लेता है। तो बौद्ध धर्म के अनुसार यदि यह इच्छाएं ही समाप्त हो जाए तो ही इंसान को असल में स्वर्ग की प्राप्ति होगी।
 
बौद्ध धर्म के अनुसार आत्मा को नरक में उसके कर्मो के हिसाब से सजा दी जाती है इसमें विभिन्न तरह की सजाओ का वर्णन किया गया है।

विभिन्न धर्मों में स्वर्ग- नरक |Kya hai Swarg Aur Narak Dharmo me?

हर धर्मो में कर्मों के अनुसार स्वर्ग और नरक का निर्धारण किया जाता है ,वह अपने हर किये गए कार्यो के प्रति उत्तरदायी होता है |और उसका फल उसको भुगतना होता है| चाहे वो अच्छा हो और या बुरा यही नियति है यदि मनुष्य पुण्य कमाएगा तो उसे स्वर्ग की प्राप्ति होगी, लेकिन यदि वह पाप करेगा तो उसे संसार मिलेगा जो कि उसे जीने-मरने के जाल से कभी बाहर नहीं आने देगा। लेकिन अगले जन्म में यदि वह अच्छे कर्म करेगा और अपने बुरे कर्मों का नास करके जन्म- मरण के चक्र से बाहर आ सकते हैं। तो हो सकता है कि उसे मोक्ष प्राप्त हो जाए।
मनुष्य को अपने आराध्य को हमेशा याद रखना चाहिए |चाहे वो किसी भी धर्म को मानने वाला हो और धरम अनुसार अपने भगवान,अल्लाह ,यीशु ,बुद्ध में श्रद्धा रखे क्योंकि इनके ही माध्यम से पुण्य और स्वर्ग की और जाया जा सकता है और पाप और नरक की पीड़ा से बचा जा सकता है| यही है विभिन्न धर्मों में स्वर्ग- नरक
(Kya hai Swarg Aur Narak Dharmo me? )
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