स्वर्ग नरक | Swarg and Narak In Hindi
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| Swarg-Narak-Kya-Hai-Narak-Kitne-Prakar-Ke-Hote-Hai |
सम्पूर्ण जीवो का जीवन स्थल पृथ्वीलोक परन्तु मृत्यु के उपरांत केवल निर्जीव शरीर ही पृथ्वीलोक पर रह जाता है । और आत्मा उस शरीर को त्याग कर नए पथ पर आगे बढ़ती है, वह स्थान है स्वर्ग या नरक(Swarg or Narak) जहाँ मृत्यु के बाद आत्मा का निवास होता है ।
क्या है स्वर्ग और नरक ?
दुनिया के सभी धर्मो में नरक और स्वर्ग की बातें कही गई है । सबसे पहले स्वर्ग जहां देवता रहते हैं और अच्छे कर्म करने वालो की आत्मा को भी वहां स्थान मिलता है,अथार्त स्वर्ग वह स्थान जहाँ पर आत्मा को मरने के बाद सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते है। दूसरे शब्दों में कहे तो वह स्थान जहां अच्छी आत्माएं रहती है और अपने पुण्य के अनुसार स्वर्ग में सुख भोगती है|
धार्मिक मान्यता अनुसार नरक वह स्थान है जहाँ पापियों की आत्मा दंड भोगने के लिए भेजी जाती है । जहां उन्हें सजा के तौर पर गर्म तेल में डाला जाता है और अंगारों पर चलाया जाता है।इसके बाद अपने कर्म के अनुसार उनका दूसरी योनियों में जन्म होता है ।
कैसे होता है Swarg और Narak का फैसला ?
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अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब
पुराणों के अनुसार मृत्यु का देवता यमराज को माना जाता है यमराज ही आत्माओं को दंड या पुरस्कार देते है । चित्रगुप्त द्वारा सभी जीवों के कर्मो का हिसाब - किताब रखा जाता है सभी जीवात्मायें के अपने किये गये कर्मो के आधार पर स्वर्ग और नरक का फैसला किया जाता है, जब एक बार चित्रगुप्त उस जीव का लेखा-जोखा बताते है उसके पश्चात यमराज की आज्ञा से यमदूत उस जीव आत्मा को स्वर्ग और नरक में भेजते है ।
कहाँ है स्वर्गलोक और नरकलोक ? (Swarg aur Narak)
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धार्मिक मान्यता अनुसार कि स्वर्ग धरती के ऊपर है स्वर्गलोक के राजा इंद्र है । नरकलोक धरती के नीचे पाताल भूमि में हैं। वेदो के अनुसार जहाँ हम लोग रहते है वह मध्य लोक है |
स्वर्गलोक को ऊर्ध्व लोक अर्थात् ऊपर का लोक |मध्यलोक यानि की हमारा लोक (पृथ्वी )|
अधोलोक अर्थात् नीचे का लोक ।
मृत्यु के बाद क्या होता है ? (Swarg aur Narak)
जब भी कोई जीव मरता है ,तो आत्मा शरीर को त्यागकर आगे की यात्रा प्रारंभ करती है आत्मा सैतालिस दिन तक यात्रा करने के पश्चात यमपुरी पहुंचती है अत: आत्मा के कर्मों पर ही निर्भर करता है कि वह किस मार्ग पर चलेगी। पुराणों के अनुसार आत्मा के लिए तीन मार्ग होते है 1- अर्चि मार्ग, 2-धूम मार्ग और 3- उत्पत्ति-विनाश मार्ग।
अर्चि मार्ग- वह मार्ग जो ब्रह्मलोक और देवलोक की यात्रा के लिए होता है।
धूममार्ग - यह मार्ग पितृलोक की यात्रा पर ले जाता है ।
उत्पत्ति-विनाश मार्ग - नर्क की यात्रा के लिए होता है।
स्वर्ग में आत्मा कब तक रहती है ? (Swarg aur Narak)
स्वर्ग में आत्मा जब तक रहती है जब तक की उसके पुण्य क्षीण नहीं हो जाते उसके बाद उसे फिर दे पृथ्वी लोक पे जनम लेना होता है।
नरक कितने प्रकार के होते है ?
हिंदू पौराणिक ग्रंथों में 36 तरह के मुख्य नर्कों का वर्णन किया गया है। गरूड़ पुराण जैसे प्रामाणिक ग्रंथ में कुल 84 लाख नरक बताए गए हैं उनमे से 36 मुख्य नर्को के नाम इस तरह से है|
2- कुंभीपाक
3- रौरव
4- मंजूष
5- अप्रतिष्ठ
6- विलेपक
7- महाप्रभ
8- जयंती
9- शाल्मलि
10- महारौरव
11- तामिस्र
12- महातामिस्र
13- असिपत्रवन
14- करम्भ बालुका
15- काकोल
16- कुड्मल
17- महाभीम
18- महावट
19- तिलपाक
20- तैलपाक
21- वज्रकपाट
22- निरुच्छवास
23- अंगारोपच्य
24- महापायी
25- महाज्वाल
26- क्रकच
27- गुड़पाक
28- क्षुरधार
29- अम्बरीष
30- वज्रकुठार
31- परिताप
32- काल सूत्र
33- कश्मल
34- उग्रगंध
35- दुर्धर
36- वज्रमहापीड
उपरोक्त नर्को में उस जीव के कर्मो के अनुसार अलग-अलग सजा दी जाती है यह हिन्दू धर्म में 36 मुख्य नरक बताये गए है | यहाँ मुख्य नरक से तात्पर्य यह है की इन नरको में सजा बहुत ही भयावय होती है। अन्य धर्मो में इनका अलग से वर्णन है । हर धर्म में सजाओ का भी अलग अलग वर्णन भी है ।
आपकी राय
सभी धर्मो में पाप और पुण्य का अलग अलग वर्णन किया गया है परन्तु सभी धर्मो में कर्मो को महत्वता दी गयी है। यदि आपके कर्म अच्छे होंगे तो फलस्वरूप आपको अच्छे फल प्राप्त होंगे|
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